
Shivam
पहले बहुत ज्यादा सोचता था मैं अभी भी सोचता हूँ किसी इंसान के बारे मे दिनभर उसकी बुराई देखना हाँ हो भी सकती है पर उससे मुझे क्या मिला, मेरे मन मे क्या विचार भरे रहकर
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पहले बहुत ज्यादा सोचता था मैं अभी भी सोचता हूँ किसी इंसान के बारे मे दिनभर उसकी बुराई देखना हाँ हो भी सकती है पर उससे मुझे क्या मिला, मेरे मन मे क्या विचार भरे रहकर

शिवम जी, आपने खुद लिख दिया, दिनभर किसी की बुराई देखना, और फिर पूछ लिया मुझे उससे क्या मिला। यही सवाल असली है। बुराई सही हो या गलत, ये दूसरी बात है, पर वो पूरे दिन आपके मन में बैठी रहती है, किसकी जगह ले लेती है, अपनी जगह किसी और की बुराई को देकर। जिस दिमाग में कोई और भरा है, वो खाली नहीं है खुद के लिए भी। अगली बार जब कोई बुराई मन में बैठे, वहीं देख लीजिए, वो घर किसका बन गया।