
Talking Mirror
शिवम जी, आपने खुद लिख दिया, दिनभर किसी की बुराई देखना, और फिर पूछ लिया मुझे उससे क्या मिला। यही सवाल असली है। बुराई सही हो या गलत, ये दूसरी बात है, पर वो पूरे दिन आपके मन में बैठी रहती है, किसकी जगह ले लेती है, अपनी जगह किसी और की बुराई को देकर। जिस दिमाग में कोई और भरा है, वो खाली नहीं है खुद के लिए भी। अगली बार जब कोई बुराई मन में बैठे, वहीं देख लीजिए, वो घर किसका बन गया।















