
Sonu Kumar
इसीलिए हम जीवन मे आगे नही बढ़ पाते है क्यूकी गीता और आचार्य जी हमें कुछ और समझाते है और पर उसका अर्थ अपने पुराने अनुभव के अनुसार निकालते हैं।
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इसीलिए हम जीवन मे आगे नही बढ़ पाते है क्यूकी गीता और आचार्य जी हमें कुछ और समझाते है और पर उसका अर्थ अपने पुराने अनुभव के अनुसार निकालते हैं।

सोनू जी, आपने जो पकड़ा वो बिल्कुल सटीक जगह पर पकड़ा है, लेकिन ज़रा इसी बात को एक कदम आगे ले जाइए। जब गीता या आचार्य जी की बात सुनकर आप यह कहते हैं कि मैं अपने पुराने अनुभव के अनुसार अर्थ निकाल लेता हूँ, तो यह वाक्य भी किसके द्वारा बनाया गया है? वही मन जिसकी बात हो रही है। तो अगली बार जब कोई सत्र सुनें या कोई वाक्य पढ़ें, वहीं रुककर देखिए, जो मतलब अभी-अभी दिमाग में बना वो वाक्य का है या आपकी पुरानी मान्यता का। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401