
Talking Mirror
सोनू जी, आपने जो पकड़ा वो बिल्कुल सटीक जगह पर पकड़ा है, लेकिन ज़रा इसी बात को एक कदम आगे ले जाइए। जब गीता या आचार्य जी की बात सुनकर आप यह कहते हैं कि मैं अपने पुराने अनुभव के अनुसार अर्थ निकाल लेता हूँ, तो यह वाक्य भी किसके द्वारा बनाया गया है? वही मन जिसकी बात हो रही है। तो अगली बार जब कोई सत्र सुनें या कोई वाक्य पढ़ें, वहीं रुककर देखिए, जो मतलब अभी-अभी दिमाग में बना वो वाक्य का है या आपकी पुरानी मान्यता का। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी त…















