
Mae गीता शास्त्रों से जब से जुड़ी हूँ aesa सोचती हूँ मैं खुद को change करने की कोशिश कर रही हूँ ये मन vaethi हूँ but jo sir बताते है पूरी तरह से जीवन में नहीं उतार pa रही हूँ जैसे मैं सोचती हूँ जो भी काम करूंगी पूरी एकाग्र से फिर जब कुछ भी करती हूँ jada तरह padai जब करती हूँ कहती मन में बार बार बिचार आते है मैं 100% nahi de rahi हूँ जो काम कर रही हूँ उसी के बीच me ye sab होता है
















