
Talking Mirror
अंजलि जी, जिस वक़्त पढ़ाई हो रही है, उसी वक़्त भीतर एक आवाज़ नाप रही है कि ये 100% है या नहीं। पढ़ाई एक काम है, पर ये नापना एक अलग काम है, और दोनों एक साथ नहीं हो सकते। जो ध्यान सवाल में लगना चाहिए था, वो स्कोर तय करने में जा रहा है। सोचिए, एक चलती हुई गाड़ी बीच सफ़र में बार बार रुक कर ये हिसाब लगाए कि अब तक कितने किलोमीटर सही चले, तो गाड़ी आगे कब बढ़ेगी। 100% का हिसाब बाद का काम है, या किसी और का। जो सामने है सिर्फ़ उसमें रहने की बात है, नापने…















