
Surabhi
मेरी समस्या भाषा से संबंधित है मैने इंग्लिश को खुद के लिए इतना कठिन माना कि समय के साथ वो और बढ़ता ही गया।
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मेरी समस्या भाषा से संबंधित है मैने इंग्लिश को खुद के लिए इतना कठिन माना कि समय के साथ वो और बढ़ता ही गया।

सुरभि जी, ध्यान दें कि आपने क्या कहा, अंग्रेजी कठिन नहीं थी, आपने उसे कठिन मान लिया, और फिर उस मानने को ही सच होने दिया। यही वो जगह है जहाँ मजबूरी बनती है, तथ्य से नहीं, अपनी ही धारणा को समय दे देने से। दुर्गाबाई के सामने भाषा की दीवार भी थी, उन्होंने पाठशाला खोलकर उसी दीवार को अपना काम बनाया। अब सवाल ये है, वो दीवार अब भी उतनी ही ऊँची है, या उसे ऊँचा बनाए रखने में अब आपकी आदत का हाथ ज़्यादा है?

मुझे अपनी पढ़ाई पूरी करने का एक भी अवसर नही मिला जिससे मुझे आज तक अफ़सोस हैलेकिन आप जैससमझ रही है वैसाकुछ भी नहीं है मुझे ये समझना है और कोशिश करते रहना है ये बात आप निश्चित रूप से समझ लो तो कामयाबी मिलेगी