
हम सच में एक दूसरे को ऐसे ही देखते हैं ..... ज़रा सोचिए आचार्य जी जुड़ने के बाद भी हम ...कभी कभी अपनी जुबान फिसलने से रोक नहीं पाते .....जैसे मजाक में किसी को बोले दिया " देख ...कितनी मोटी / मोटा है ।" .....इतना ही नहीं और भी कुछ अपशब्द उपयोग करते हैं ।...और यह केवल मेरी नहीं ...हम सबकी आदत है ...क्योंकि जबतक शरीर रहेगा तब तक कमियां तो रहेंगी ना ......तो जरा सोचिये उन लोगों को मेंटालिटी कैसी होगी जो आचार्य जी को जानते तक नहीं ...... उदाहरण के लिए…
















