
Ha mai mere अंदर bhi aisi bahut sari समस्याएं h jinhe mai badlna चाहती हूं पर शुरुआत s darti hu kyuki mai परिणाम k सोचने लगती हूं मैं जिस तरह से सबको जीवन जीते देखती आ रही हूं उसमें परिवर्तन करना चाहती हूं
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Ha mai mere अंदर bhi aisi bahut sari समस्याएं h jinhe mai badlna चाहती हूं पर शुरुआत s darti hu kyuki mai परिणाम k सोचने लगती हूं मैं जिस तरह से सबको जीवन जीते देखती आ रही हूं उसमें परिवर्तन करना चाहती हूं

जिज्ञासा जी, आपने खुद पकड़ा है, परिणाम सोचने लगती हूं और वहीं रुक जाती हूं। गौर करें, यह डर बदलाव के डर से नहीं है, यह उस पल का डर है जब आप पहला कदम उठाएंगी और पता नहीं क्या होगा। बिरसा को भी नतीजा पता नहीं था, फिर भी चले। परिणाम की गारंटी लेकर कोई विद्रोह शुरू नहीं होता, नीयत लेकर होता है। आप नतीजा तय करने बैठी हैं जबकि वो आपके हाथ में ही नहीं है, सिर्फ शुरुआत आपके हाथ में है। जिस जीवन-शैली को आप बदलना चाहती हैं, उसकी शुरुआत किसी बड़े ऐलान से नहीं, किसी एक छोटी ईमानदार जगह से होगी। सत्रों और शिविरों से जुड़ी रहें, वहां यही साफ़ होता जाएगा कि पहला कदम कहां से उठाना है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401