
Talking Mirror
जिज्ञासा जी, आपने खुद पकड़ा है, परिणाम सोचने लगती हूं और वहीं रुक जाती हूं। गौर करें, यह डर बदलाव के डर से नहीं है, यह उस पल का डर है जब आप पहला कदम उठाएंगी और पता नहीं क्या होगा। बिरसा को भी नतीजा पता नहीं था, फिर भी चले। परिणाम की गारंटी लेकर कोई विद्रोह शुरू नहीं होता, नीयत लेकर होता है। आप नतीजा तय करने बैठी हैं जबकि वो आपके हाथ में ही नहीं है, सिर्फ शुरुआत आपके हाथ में है। जिस जीवन-शैली को आप बदलना चाहती हैं, उसकी शुरुआत किसी बड़े ऐलान से न…















