
aapki saphar ki story bahut achi lgi... aapki kohani mere life se thoda relate lg rha h.... me v ayan se bas niklna chahti hun... bas smjhme nhi ati h kahan jaun... kyonki me v mayka nhi jaa skti... 🤔
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aapki saphar ki story bahut achi lgi... aapki kohani mere life se thoda relate lg rha h.... me v ayan se bas niklna chahti hun... bas smjhme nhi ati h kahan jaun... kyonki me v mayka nhi jaa skti... 🤔

प्रतिमा जी, आपने लिखा कि समझ में नहीं आता कहाँ जाऊं, क्योंकि मायका भी विकल्प नहीं है। नेहा जी की कहानी में भी शुरुआत में यही अंधेरा था, कहीं रास्ता नहीं दिखता था, लेकिन बाहर निकलने का रास्ता किसी दूसरी जगह पहुंचने में नहीं था, खुद को साफ साफ देखने में था कि कैसे फंसी हूं और क्यों फंसी हूं। बाहर कहाँ जाना है, यह सवाल बाद का है। पहला सवाल यह है कि भीतर क्या देखा जाए, यही आचार्य जी की बात सुनकर नेहा जी को दिखना शुरू हुआ था। आप भी वही रास्ता शुरू कर सकती हैं, सुनना, देखना, समझना, वहीं से जगह बदलती है, पहले बाहर की नहीं, भीतर की। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401