
Ritisha Namdev
पहले मेरी भूमिका पहचान या मान्यता मेरे व्यवहार को इतना स्वाभाविक बन चुकी थी की मेरे सामने अगर कुछ ग़लत होता था तो में उसको चुप रह कर देख ती थी । लेकिन अब मैंने अपनी नियत को बदलने की कोशिश की है और अपनी भूमिका को अपना ढाल बनाना बंद कर दिया है ।
















