
मेरी मान्यता थी कि मैं मैथ्स में अच्छा हूँ। मैं बहुत दिनों तक इस बात पर गर्व किया करता था कि मैं मैथ्स में तेज़ हूँ। लेकिन जब दूसरे दृष्टिकोण से देखा, तो समझ में आया कि परिस्थितियाँ ही ऐसी थीं कि मुझे शुरू से ही ट्यूटर वैसे मिले, जो ज़्यादा मैथ्स पर ही फोकस करते थे। अगर दूसरे विषय पढ़ाने वाले ट्यूटर मिल गए होते, तो शायद मैं उस विषय में भी अच्छा होता।
















