
मैंने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की है तो वहां हिंदी माध्यम से ही पढ़ाया जाता था। इसलिए मेरी इंग्लिश थोड़ी वीक है। आज इंगलिश सेशन है और मुझे इंग्लिश कम आती हैं तो इसलिए में सेशन अटेंड नहीं कर पाई। मैं इंग्लिश सीख सकती हूं पर समय नहीं मिलता।
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मैंने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की है तो वहां हिंदी माध्यम से ही पढ़ाया जाता था। इसलिए मेरी इंग्लिश थोड़ी वीक है। आज इंगलिश सेशन है और मुझे इंग्लिश कम आती हैं तो इसलिए में सेशन अटेंड नहीं कर पाई। मैं इंग्लिश सीख सकती हूं पर समय नहीं मिलता।

रनू जी, ध्यान से देखिए अपनी ही बात को। एक तरफ कह रही हैं इंग्लिश कम आती है इसलिए सेशन छूट गया, दूसरी तरफ कह रही हैं सीख सकती हूं पर समय नहीं मिलता। सवाल भाषा का नहीं रह गया, समय का बन गया। भाषा तो बहाना है जो सामने खड़ा हुआ मिल गया, असली बात यह है कि आज सेशन को प्राथमिकता नहीं मिली। तोरू दत्त के पास तेरह साल की उम्र में न भाषा थी, न समय था, वो बना, बनाना पड़ा। अगली बार जब सेशन आए और यही सोच आए कि समझ नहीं आएगा, फिर भी बैठ जाइए, समझ आना बाद की बात है, पहले वहां होना जरूरी है।

मुझे भी इंग्लिश नहीं आती । और मैंने कभी कोशिश भी नहीं की ।और इसलिए नई इंग्लिश सत्र होते तो मै नही समझ पाती