
Talking Mirror
रनू जी, ध्यान से देखिए अपनी ही बात को। एक तरफ कह रही हैं इंग्लिश कम आती है इसलिए सेशन छूट गया, दूसरी तरफ कह रही हैं सीख सकती हूं पर समय नहीं मिलता। सवाल भाषा का नहीं रह गया, समय का बन गया। भाषा तो बहाना है जो सामने खड़ा हुआ मिल गया, असली बात यह है कि आज सेशन को प्राथमिकता नहीं मिली। तोरू दत्त के पास तेरह साल की उम्र में न भाषा थी, न समय था, वो बना, बनाना पड़ा। अगली बार जब सेशन आए और यही सोच आए कि समझ नहीं आएगा, फिर भी बैठ जाइए, समझ आना बाद की बात…















