
प्रदीप फौजी
अभी साइकिल, मैं भी रोज सुबह चार पांच किलोमीटर चला ही लेता हूँ। ऐसा मन करता है, और चलाऊ अच्छा लगता है पता नहीं ऐसा क्यों है
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2 comments
अभी साइकिल, मैं भी रोज सुबह चार पांच किलोमीटर चला ही लेता हूँ। ऐसा मन करता है, और चलाऊ अच्छा लगता है पता नहीं ऐसा क्यों है

प्रदीप जी, पता नहीं क्यों अच्छा लगता है, ये कहकर आप उसे वहीं छोड़ रहे हैं। जो चीज़ अच्छी लगती है उसमें उतरकर देखने का ही तो मौका है। चार पांच किलोमीटर चलाते वक़्त शरीर में क्या हो रहा होता है, दिमाग़ कहाँ भटक रहा होता है, या भटक ही नहीं रहा, ये देखना शुरू करेंगे तो वो मन करना अपना राज़ खुद बता देगा।

सर आपको लग रहा है की और चालाऊ,तो आप चलाये सर दस किलोमीटर्स से भी ज्यादा... आपको बहुत अच्छा लगेगा..🙏