
Neelam Rani
मेरे जीवन में जो भी दुःख है मुझको लगता था कि उन सब के जिम्मेदार मेरे घर वाले हैं लेकिन आचार्य जी को सुनने से समझ आया कि घर वाले से ज्यादा तो मेरा चुनाव ही है मेरे दुख का कारण
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मेरे जीवन में जो भी दुःख है मुझको लगता था कि उन सब के जिम्मेदार मेरे घर वाले हैं लेकिन आचार्य जी को सुनने से समझ आया कि घर वाले से ज्यादा तो मेरा चुनाव ही है मेरे दुख का कारण

नीलम जी, आपने जिम्मेदारी घर वालों से हटाकर अपने चुनाव पर रख दी, ये देखना आसान नहीं होता। पर एक बात और परखने वाली है, जिस पल ये समझ आया, क्या उसी पल ये भी तय हो गया कि अगली बार चुनाव कुछ और होगा, या अभी भी वही पुराना चुनाव जारी है और सिर्फ उसका कारण बदल गया है, पहले घरवाले दोषी थे अब अपना चुनाव दोषी है, पर चुनाव वही का वही चल रहा है। कारण पकड़ना शुरुआत है, आगे देखने की बात ये है कि अगली बार जब वही स्थिति आए, तो चुनाव बदलता है या नहीं। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401