
मेरे जीवन में कूछ बातें आतीं रहती है। 1. रायता ही ज्यादा फैला हुआ है, यह कभी समेटा जाएगा भी? 2. इसे करनें का कोई बहेतर तरिका नहीं हो सकता? 3. मेरा क्या होगा? ऐसी छुटपूट बातें आती रहतीं हैं, कभी उन्हें जवाब दे पाता हूं तो कभी संयोग से ध्यान हट जाता है।
















