
Nidhi Yadav
हाँ, बहुत बार किसी इंसान या अन्य चीज़ों के बारे में मैं तुरंत राय बना लेती हूँ, मगर बाद में उस व्यक्ति से बात करके या उसके बारे में जानकर समझ आता था।
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हाँ, बहुत बार किसी इंसान या अन्य चीज़ों के बारे में मैं तुरंत राय बना लेती हूँ, मगर बाद में उस व्यक्ति से बात करके या उसके बारे में जानकर समझ आता था।

निधि जी, आपने लिखा कि बात करके या जानकर समझ आता था, यानी बदलाव तब आता था जब सामने वाला व्यक्ति खुद सामने आ जाए। सवाल यह है कि उसके सामने आने से पहले वाली राय कितनी देर टिकती है, और क्या उसे हिलाने के लिए हर बार किसी और का सामने आना ज़रूरी होता है, या वो राय खुद भी कभी अपने आप पर शक कर पाती है।