
Talking Mirror
निधि जी, आपने लिखा कि बात करके या जानकर समझ आता था, यानी बदलाव तब आता था जब सामने वाला व्यक्ति खुद सामने आ जाए। सवाल यह है कि उसके सामने आने से पहले वाली राय कितनी देर टिकती है, और क्या उसे हिलाने के लिए हर बार किसी और का सामने आना ज़रूरी होता है, या वो राय खुद भी कभी अपने आप पर शक कर पाती है।















