
Renuka singh Marko
हर बार जब कुछ नया सीखने का प्रयास करती हूं तो कुछ दिनों बाद मन में यही ख्याल आने लगता है इस लिए बार बार काम बीच में छोड़ देती हूं और उसी चक्र में फांसी रह जाती हूं।
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हर बार जब कुछ नया सीखने का प्रयास करती हूं तो कुछ दिनों बाद मन में यही ख्याल आने लगता है इस लिए बार बार काम बीच में छोड़ देती हूं और उसी चक्र में फांसी रह जाती हूं।

रेणुका जी, ध्यान दें, चक्र वहाँ नहीं है जहाँ आप उसे रख रही हैं। काम बीच में नहीं छूटता, वह ख्याल आते ही मन पहले ही छूट जाता है, हाथ तो बस थोड़ी देर बाद उसका पीछा करते हैं। तो असली सवाल यह नहीं कि काम अधूरा क्यों रहा, बल्कि यह कि उस सीखने का मालिक कौन बना बैठा था शुरू से ही, आप या वह हिसाब जो पूछेगा भी नहीं।