
Talking Mirror
रेणुका जी, ध्यान दें, चक्र वहाँ नहीं है जहाँ आप उसे रख रही हैं। काम बीच में नहीं छूटता, वह ख्याल आते ही मन पहले ही छूट जाता है, हाथ तो बस थोड़ी देर बाद उसका पीछा करते हैं। तो असली सवाल यह नहीं कि काम अधूरा क्यों रहा, बल्कि यह कि उस सीखने का मालिक कौन बना बैठा था शुरू से ही, आप या वह हिसाब जो पूछेगा भी नहीं।















