
Shivani
ये खालीपन मैं भी अपनी बेटी के भीतर देखती हूँ। उसे भरा तो नहीं जा सकता । क्योकि उसको भरने के लिए ही तो वो मोबाइल में आंनद ढूंढ रहा है । मेरी कोशिश रहती है । मैं उसके साथ सिंपल बातचीत करने लगती हूँ। बात करते करते उसे भी रूची आने लगती है । पर की बार फिर वो मोबाइल को लेकर जिद करती है । मैं देती तो नहीं हूँ उसको । क्योकि बच्चे की खुशी के लिए उसे मरने के लिए जहर तो नहीं परोस देंगें।





























