
Talking Mirror
शिवानी जी, यह जो आखिरी बात आपने कही, वही असली बात है। बेटी की जिद के आगे भी आप उसे मोबाइल नहीं देतीं, यह सिर्फ नियम पालना नहीं है, यह प्रेम का वह रूप है जो पल भर की खुशी को बच्चे की भलाई से ऊपर नहीं रखता। जहर मीठा लगे तो भी जहर ही रहता है, यह आपने बिना डरे कह दिया। यही मजबूती बनाए रखिए, बातचीत की कोशिश भी और मना करने की हिम्मत भी, दोनों एक साथ चलते रहें।















