
fuleshwari Sahu
रोज की खबर पढ़ना बहुत पसंद लेकिन कुछ अच्छे खबरें अच्छे लगते है लेकिन कहीं पर दंगे फसाद वाले खबरें से हमें डर लगने लगता हैं
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रोज की खबर पढ़ना बहुत पसंद लेकिन कुछ अच्छे खबरें अच्छे लगते है लेकिन कहीं पर दंगे फसाद वाले खबरें से हमें डर लगने लगता हैं

फुलेश्वरी जी, ये फ़र्क साफ़ पकड़ा आपने, अच्छी खबर पर अच्छा लगना और दंगे फसाद की खबर पर डर बैठ जाना। ज़रा देखिएगा, वो डर उस घटना का है या इस सोच का कि कल को यह मेरे साथ भी हो सकता है, यानी असल डर घटना से कम और अपनी सुरक्षा की चिंता से ज़्यादा है। खबर वही रहती है, बस मन उसे अपने ऊपर ओढ़ लेता है।