
मैं जिस परिस्थिति या सीधे तौर पर नौकरी से दूर जाना चाहता हूँ, उसमें मुझे बंधन दिखाई देते हैं और यह बात सही भी है। पर मैं उसको ईमानदारी से नहीं देख पाता हूँ कि जहाँ जाऊंगा क्या वहाँ भी मुझे चुनौतियां नहीं मिलेंगी, क्या मैं वहाँ बेचैन नहीं रहूंगा? क्या बस इस नौकरी में ही बेचैनी है? मैं बेचैन हूँ लेकिन परिस्थिति बदलेगी पर बेचैनी नहीं जाएगी। फिर भी मैं ईमानदारी से इसको नहीं देख रहा हूँ बस परिस्थिति बदलने के पीछे पड़ा हूँ।
















