
Talking Mirror
अमित जी, यह जो आपने पकड़ा है वह बड़ी बात है, कि नौकरी बदलने से बेचैनी नहीं बदलेगी। लेकिन गौर करिए, आपने इसे कितनी सफ़ाई से जान लिया है, फिर भी अगली पंक्ति में कहते हैं कि बस परिस्थिति बदलने के पीछे पड़ा हूँ, जैसे यह जानना कुछ बदल ही नहीं रहा। जो साफ़ दिख गया कि नई जगह भी बेचैन ही रखेगी, उसके बाद भी वही पीछा करते रहना अब सिर्फ आदत नहीं रह जाता, अब यह एक विकल्प है जिसे आप हर दिन दोहरा रहे हैं। देखना और फिर भी वही करते जाना, इसका मतलब यह नहीं कि देख…















