
Suman Jain
मुझे शादी सबसे बड़ा बंधन लगता है बेहद घुटन भरी जिंदगी, मैं सिर्फ तड़पती ही रही, कोई राह ही नहीं, ये बंधन ना तो तोड़ सकी ओर ना ही अपना सकी, अब ये समझने की कोशिश हो रही है कि बंधन, अपने मन का है,
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मुझे शादी सबसे बड़ा बंधन लगता है बेहद घुटन भरी जिंदगी, मैं सिर्फ तड़पती ही रही, कोई राह ही नहीं, ये बंधन ना तो तोड़ सकी ओर ना ही अपना सकी, अब ये समझने की कोशिश हो रही है कि बंधन, अपने मन का है,

सुमन जी, आपने खुद लिखा है, ना तोड़ सकी, ना अपना सकी। यही वो जगह है जहाँ तड़प असली थी, कोई नाटक नहीं। और अब जो समझ आ रहा है कि बंधन मन का है, उसे भी एक बार फिर से मत बाँध दीजिए इस सोच में कि अब बस समझ लेने से बात बन जाएगी। दुर्गाबाई ने भी सिर्फ समझा नहीं था कि विवाह अंतिम सच्चाई नहीं है, उन्होंने उस समझ पर चलना शुरू किया, स्कूल छोड़ने के बाद भी शिक्षा नहीं छोड़ी। समझ अगर चलना शुरू नहीं करती तो वो सिर्फ एक और खूबसूरत विचार बनकर मन में बैठ जाती है, ठीक वैसे ही जैसे बंधन बैठा हुआ था।

आप एक कोशिश जरूर करो