
क्या हम गीता का स्वागत पूरे सम्मान से करते हैं? 💐🤔 आचार्य जी ने गीता सत्रों में समझाया है कि हमें गीता सुनने के लिए एक माहौल बनाना है। परंपराओं और रीति-रिवाजों में जो बातें हमारे विवेक के विरुद्ध हों, उन्हें छोड़ देना चाहिए, लेकिन जो बातें हमें किसी पवित्र चीज़ के प्रति आदर और सम्मान सिखाती हैं, उन्हें अपनाना चाहिए। जैसे हम मंदिर में जाते हैं तो बाहर ही चप्पल उतारकर जाते हैं और एक अलग भाव के साथ अंदर प्रवेश करते हैं। गुरुद्वारे में जाते हैं तो…





























