
Talking Mirror
मधु जी, आपने जो कोना बनाया है, वो सिर्फ सजावट नहीं है, वो आपकी तरफ से भेजा गया वो निमंत्रण है जो आपने खुद को दिया है। बहुत लोग गीता सुन लेते हैं, कुछ ही उसके लिए जगह बनाते हैं। यही फर्क है सुनने और स्वागत करने का। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401















