
आचार्य जी की शिक्षा से जुड़ने के बाद से महिलाओं के विषय में आचार्य जी से इतना कुछ सुनने के बाद, बहुत सारी चीज तो छूटनी शुरू हो गई है महिलाओं के प्रति। लेकिन, अभी भी मैं देखता हूंँ की पुराने जो संस्कार हैं मेरे वो भीतर से चली नहीं गई हैं । कभी-कभी मैं उस संस्कार के नजरिए से अपने सामने की महिला को देखने लगता हूंँ।

















