
जब मैं अपने आस पड़ोस, समाज और परिवार में देखती हूँ तो सोचती हूँ के कितने ऐसे घर है जहां सिर्फ दो भाई या दो बेटे हैं लेकिन ऐसे कितने जोड़े हैं जिनकी सिर्फ एक बेटी या दो बेटियां है या तीन के बाद भी मामला शांत हो गया है? महिला की जान पर बन आती हैं खुद को तोड़ तोड़ कर नई जान बनाने में लेकिन उसके परिवार और समाज को बस एक बेटा और चाहिए और वो महिला भी इतनी दोषी पाती है खुद को के मर जाऊंगी लेकिन ये गर्व का काम करके ही मरूंगी। आज भी एक पढ़ा लिखा बाप और मॉड…
















