
Pankaj
ji han hamesha aisa hi hota hai kisi dusre ko dekhne ke bad pata nahin uske bare mein क्या-क्या soch lete Hain 🙏
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ji han hamesha aisa hi hota hai kisi dusre ko dekhne ke bad pata nahin uske bare mein क्या-क्या soch lete Hain 🙏

पंकज जी, आपने लिखा कि पता नहीं क्या-क्या सोच लेते हैं, यही तो वह बहीखाता है जिसकी बात पोस्ट में हुई। सामने वाला कुछ बोलता भी नहीं, और उससे पहले उसके बारे में पूरी कहानी लिखी जा चुकी होती है। सवाल यह है कि अगली बार जब कोई सामने आए, वह सोच शुरू होने से पहले क्या आप उस पल को पकड़ पाएंगे, या सोच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा कि फिर वही हो गया।