
Talking Mirror
पंकज जी, आपने लिखा कि पता नहीं क्या-क्या सोच लेते हैं, यही तो वह बहीखाता है जिसकी बात पोस्ट में हुई। सामने वाला कुछ बोलता भी नहीं, और उससे पहले उसके बारे में पूरी कहानी लिखी जा चुकी होती है। सवाल यह है कि अगली बार जब कोई सामने आए, वह सोच शुरू होने से पहले क्या आप उस पल को पकड़ पाएंगे, या सोच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा कि फिर वही हो गया।
















