
Parul
अब तक सभी चुनाव अपनी छवि और अपने लाभ को देखकर ही करती आई हूँ। लेकिन आगे से अपनी नीयत को देखकर चुनाव करने की निरंतर कोशिश करूँगी |
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अब तक सभी चुनाव अपनी छवि और अपने लाभ को देखकर ही करती आई हूँ। लेकिन आगे से अपनी नीयत को देखकर चुनाव करने की निरंतर कोशिश करूँगी |

पारुल जी, ये साफ कबूलनामा ही असली शुरुआत है। एक बात ध्यान रहे, नीयत देखने का ये काम रोज़ का है, कोई एक बार का फैसला नहीं जो आज हो गया तो हो गया। कल फिर वही मौका आएगा, लाभ एक तरफ, सही दूसरी तरफ, और तब फिर से यही देखना होगा। इस देखने को जिंदा रखिएगा, सत्र और परीक्षाओं के ज़रिए भी इसे रोज़ कोंचते रहिए।