
मनमोहन प्रजापति
मैं देख पा रहा हूं की मेरी पूर्णता का पैमाना दूसरों के हाथों में दिया हूं दुनिया के विषय और आसपास के लोग जिनसे मेरा परिचय है
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मैं देख पा रहा हूं की मेरी पूर्णता का पैमाना दूसरों के हाथों में दिया हूं दुनिया के विषय और आसपास के लोग जिनसे मेरा परिचय है

मनमोहन जी, यह देख पाना ही असली काम है। पर ज़रा और पास से देखिए, यह पैमाना दूसरों के हाथ में किसी ने ज़बरदस्ती नहीं रखा, यह ख़ुद ही सौंपा गया है, क्योंकि ख़ुद अपनी नज़र से देखने से डर लगता है। दूसरे का फ़ैसला मानना आसान है, अपना फ़ैसला ख़ुद करना जोखिम है। तो अगला सवाल यह नहीं कि पैमाना किसके हाथ में है, यह है, वो हाथ में देने का काम कल भी होगा या आज ही रुकेगा।