विवेक जी - शिक्षक हैं और लेखन कार्य भी करते हैं। "जागने के बाद जो लिखते हो - उसमें गहराई होती है। सच और झूठ का फ़र्क दिखने लगता है।" 🔷 पहले जो लिखते थे उसमें उथलापन था। आचार्य जी से मिलने के बाद जागरण हुआ - और लेखन में गहराई आ गई। 🔷 जातिवाद, लोकधर्म, महिलाओं के प्रति घर वालों की सोच - इन सबसे लड़ने का बल मिला। बचपन से जो मान्यताएँ थीं, वो पतझड़ के पत्तों की तरह गिरने लगीं। जुड़िए गीता सत्रों से - और जागृत ज़िंदगी की शुरूआत कीजिए 🙏✨



























