
Premlal Sahu
नमस्ते सर , मुझे भी गीता छात्रों में जुड़ने से पहले अहंकार के बारे में बिल्कुल भी पता नहीं था गीता सत्र में जुड़ने के बाद अहंकार के बारे में पता चला इसके ही कारण समस्त दुख का अनुभव होता है इसे हटा दिया या मिटा दिया जाए तो संसार में दुख सुख समान हो जाता है और निस्वार्थ भाव से कर्म करने का अंतरात्मा से भाव उड़ता है ऐसा आचार्य जी के सुनने के बाद हुआ है। धन्यवाद















