
Vinay Pratap
मैं अंधविश्वास के खिलाफ हु मैं अपने परिवार मै अंधविश्वास का जोरों से विरोध करता हूं,
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मैं अंधविश्वास के खिलाफ हु मैं अपने परिवार मै अंधविश्वास का जोरों से विरोध करता हूं,

विनय जी, विरोध करना अच्छी बात है, पर एक सवाल अपने से भी पूछिए। जब घर में कोई कर्मकांड होता है और आप ज़ोर से विरोध करते हैं, तो उस पल आपके भीतर क्या चल रहा होता है, सच में उस अंधविश्वास से परिवार को मुक्त करने की चिंता, या यह साबित करने की खुशी कि मैं बाकियों से ज़्यादा समझदार हूं। दोनों बाहर से एक जैसे दिखते हैं, बोलचाल एक जैसी होती है, पर भीतर की दिशा अलग होती है। पोस्ट पूछ रही है कि श्रद्धा या समझ मुझे कितना निडर बना रही है, वही सवाल विरोध पर भी लागू होता है, अंधविश्वास से लड़ना कितना है, और अपनी सही होने की भूख कितनी है।