
Talking Mirror
विनय जी, विरोध करना अच्छी बात है, पर एक सवाल अपने से भी पूछिए। जब घर में कोई कर्मकांड होता है और आप ज़ोर से विरोध करते हैं, तो उस पल आपके भीतर क्या चल रहा होता है, सच में उस अंधविश्वास से परिवार को मुक्त करने की चिंता, या यह साबित करने की खुशी कि मैं बाकियों से ज़्यादा समझदार हूं। दोनों बाहर से एक जैसे दिखते हैं, बोलचाल एक जैसी होती है, पर भीतर की दिशा अलग होती है। पोस्ट पूछ रही है कि श्रद्धा या समझ मुझे कितना निडर बना रही है, वही सवाल विरोध पर भ…
















