
मैं अपने ही घर में लाश हूँ। पड़ोसी से जबरदस्ती मुस्कुराता हूँ, क्योंकि वो चाहता है। बच्चे के लिए कहीं नहीं जा पाता हूँ, क्योंकि बच्चे को बड़ा होना है। पत्नी के लिए कुछ नया नहीं कर सकता हूँ, क्योंकि उसे ये सब मुझे उससे अलग कर देता है। मेरा शरीर मुझे वो करने नहीं देता है, जो मैं करना चाहता हूँ, क्योंकि उसे मुझसे कुछ और करवाना है। मैं लाश हूँ ; और इस लाश से सब अपना अपना काम निकलवा रहे हैं।
















