
Talking Mirror
एकता जी, स्कूटी वाली बात बहुत साफ पकड़ी आपने। जो चीज़ पाने से पहले सांस रोक देती थी, अब गैराज में खड़ी एक साधारण वस्तु बनकर रह गई है, न प्यार न नफ़रत, बस उदासीनता। यही वो जगह है जहाँ अधिकतर लोग रुक जाते हैं और तुरंत किसी नई चाहत की तलाश शुरू कर देते हैं। आपने उस खाली जगह को देख लिया है, अभी सवाल सिर्फ ये है कि उसे फिर किसी नई कामना से भरने की जल्दी है, या उस खालीपन के साथ थोड़ा और ठहरकर देखने की हिम्मत है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अ…
















