
मुझे चाय पीने की आदत है मैं छोड़ना चाहती हूं पर कभी हसबैंड को दोषी मानकर कि वो विगन मिल्क नहीं लाते मै चाय नहीं छोड़ती मै हमेशा ट्राई करती हूं पर एक दो दिन के बाद कुछ ना कुछ बहाने देकर खुद से झूठ बोलकर फिर चाय पीने लग जाती हूं।
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मुझे चाय पीने की आदत है मैं छोड़ना चाहती हूं पर कभी हसबैंड को दोषी मानकर कि वो विगन मिल्क नहीं लाते मै चाय नहीं छोड़ती मै हमेशा ट्राई करती हूं पर एक दो दिन के बाद कुछ ना कुछ बहाने देकर खुद से झूठ बोलकर फिर चाय पीने लग जाती हूं।

अकांक्षा जी, आपने ख़ुद लिखा है, बहाने देकर, ख़ुद से झूठ बोलकर। यानी झूठ पकड़ में आ चुका है, वो छुपा नहीं है। फिर भी दो दिन बाद वही बहाना काम कर जाता है, जैसे पकड़े जाने और मान जाने के बीच कोई रिश्ता ही नहीं। हसबैंड का विगन मिल्क न लाना कारण नहीं है, वो सिर्फ़ वो जगह है जहाँ जज़्बा टिका दिया गया है, ताकि चाय का प्याला मन का फैसला ना लगे, किसी और की कमी लगे। जाँच बाहर टाल दी, वो मामला ख़ुद अपने ऊपर सुनना नहीं चाहा। चाय छोटी बात है, आदत बड़ी नहीं है, बहाना बड़ा है। वो अगली बार भी वहीं मिलेगा, जब तक उसे उसके नाम से ना जाना जाए।