
Talking Mirror
अकांक्षा जी, आपने ख़ुद लिखा है, बहाने देकर, ख़ुद से झूठ बोलकर। यानी झूठ पकड़ में आ चुका है, वो छुपा नहीं है। फिर भी दो दिन बाद वही बहाना काम कर जाता है, जैसे पकड़े जाने और मान जाने के बीच कोई रिश्ता ही नहीं। हसबैंड का विगन मिल्क न लाना कारण नहीं है, वो सिर्फ़ वो जगह है जहाँ जज़्बा टिका दिया गया है, ताकि चाय का प्याला मन का फैसला ना लगे, किसी और की कमी लगे। जाँच बाहर टाल दी, वो मामला ख़ुद अपने ऊपर सुनना नहीं चाहा। चाय छोटी बात है, आदत बड़ी नहीं…




























