
यह तो मेरी ही कहानी है लेकिन मैं देखती हु खुद को तो एक और घटना घटती है मुझे कभी कभी कुछ भी नहीं जानती हु ऐसा लगने लगता है और फिर छोटापन महसूस होने लगता है जिससे मैं अपनी हिम्मत खोने लगती हु । और जब हिम्मत बढ़ती है तो फिर शक होता है घमंड तो नहीं कर रही हु । क्या उथल पुथल मची है समझ नहीं आता।
















