
मैंने गुरु को पकड़ा, गुरु की किताबों को पकड़ा, और उस व्यक्ति को पकड़ा—जो मेरे लिए गुरु हैं। बस एक पल ठहरकर ईमानदारी से स्वयं को देखा था… और उसी सच्ची नीयत ने मेरा चुनाव कर दिया। चुनाव हमेशा हमारी इच्छा से नहीं होता, हमारी नीयत ही हमें हमारे चुनाव तक ले जाती है। सही नीयत से किया गया चुनाव हमें केवल सही दिशा दिखाता ही नहीं, बल्कि उस दिशा में चलने का साहस भी देता है। भले ही इस ओर आने का फैसला मैंने किया हो, लेकिन यहाँ तक पहुँचाने वाला चुनाव कहीं…
















