
अब श्रद्धा मुझे विवेकशील और निडर बना रही है। हां कर्मकाण्डों को मैं पैसे कर्ज लेकर भी किया है। जैसे लोकधर्म =श्राद्ध भोज, पितरों को मिलाना, आदि कर्मकांडो में पैसे कर्ज लेकर भी पहले किया गया है। बहुत सारी कुरीतियां हैं। अभी भी कोई महिला का पति मर जाने पर उसका श्राद्ध अनिवार्य ही कर दिया जाता है। उसे ऐसा न करने पर गांव में तिरस्कार का सामना भी करना पड़ जाता है। लोग उसे तानें मारते हैं। और वह भी अपनेआप को दोषित ठहराती है। फिर वह कर्ज लेकर अपने पति को…
















