
Talking Mirror
खागेश जी, जो आपने देखा वो बहुत साफ है। भूखा रहकर शाम को भोज पर टूट पड़ना, रायते की तारीफ करना, और उसी सांस में विधवा से "कोई समस्या हो तो बताना" कहकर निकल जाना, यह कोई शोक नहीं है, यह शोक का लबादा ओढ़ा हुआ एक मेला है। जिस पर दहाड़ मारकर रोने वाला कुछ पल बाद हंसी-मजाक में लौट आया, उसका दुःख कभी मृतक के लिए था ही नहीं, वो प्रदर्शन था, समाज को दिखाने के लिए कि मैं दुःखी हूं। और सबसे तीखी बात आपने खुद कही, कि इस पूरे कर्मकांड में किसी को उन अनाथ बच्…















