
जब मैं घर से अलग रहने लगी तब जो अकेलापन था वो मुझे बहुत खा रहा था , मैं रोती रहती कि मैं बहुत अकेली हु लेकिन फिर मैने लाइब्रेरी ज्वाइन कर ली तो अब मेरे पास वक्त ही नहीं है खाली रहने का , मजा भी आता है पढ़ने में अब लगता है कि व्यर्थ ही मरी जा रही थी मैं दूसरों की उपस्थिति के लिए, जो है सब मेरे में ही है जिम भी ज्वाइन करने की सोची हु पर अभी मैनेज नहीं हो पाएगा इसलिए अभी नहीं कर रही हु रूम के ही योग एक्सरसाइज कर लेती हु
















