
Talking Mirror
मुस्कान जी, लाइब्रेरी जॉइन करने से वक्त भर गया और अकेलापन दबा गया, ये तो दिख गया आपको। लेकिन एक बात और देखिए, पहले आप दूसरों की उपस्थिति से खाली जगह भरती थीं, अब किताबों और व्यस्तता से भर रही हैं, खालीपन अभी भी भरा जा रहा है बस सामान बदल गया है। जिम का मामला भी यही बता रहा है, मैनेज नहीं हो पाएगा ये सोचकर टाल दिया, पर अकेले रहकर जो लगा वो सवाल अभी भी जवाब मांग रहा है कि मैं जो हूं वो वास्तव में किसके बिना रह सकता हूं, किसी चीज़ से भरे बिना। और ह…















